सहरसा नगर निगम क्षेत्र के 46 वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद, 3 नवंबर को मुख्य सड़कों और मोहल्लों में कई लाइटें बंद या पूरी तरह गायब पाई गईं। स्थानीय निवासियों ने दीपावली से पहले इनकी मरम्मत की मांग तेज कर दी है, क्योंकि त्योहारी सीजन में सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में स्ट्रीट लाइटों की स्थापना और रखरखाव पर करोड़ों रुपये व्यय किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। कई वार्डों में लाइटें या तो जलती नहीं हैं या उनके खंभे ही गायब हैं। 3 नवंबर की शाम को किए गए निरीक्षण में मुख्य मार्गों पर अंधेरा छाया रहा, जिससे आम लोगों में रोष व्याप्त है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दीपावली जैसे पर्व पर रात्रि में बाजारों और मोहल्लों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन खराब स्ट्रीट लाइटें दुर्घटनाओं और असामाजिक तत्वों के लिए खतरा बन सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है, ताकि त्योहार के दौरान सुरक्षित माहौल सुनिश्चित हो सके।
नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ वार्डों में तकनीकी खराबी और बजट की कमी के कारण मरम्मत में देरी हो रही है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि दीपावली से पहले प्राथमिकता के आधार पर मुख्य सड़कों की लाइटें ठीक करा दी जाएंगी। लेकिन लोगों का कहना है कि हर साल ऐसे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होता।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए एक सुदृढ़ निगरानी प्रणाली और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। सहरसा नगर निगम को चाहिए कि वह वार्ड-वार सर्वे कराकर खराब लाइटों की सूची बनाए और समयबद्ध तरीके से मरम्मत सुनिश्चित करे। दीपावली से पहले राहत मिलने से न केवल जनता का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता आएगी।