सहरसा जिले में भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया को गति देने के लिए 2 नवंबर को बनमा-ईटहरी और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंडों के विभिन्न ग्राम सभाओं में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य भूमि धारकों से खतियान और वंशावली संबंधी दस्तावेज एकत्र करना है, ताकि सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा हो सके। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित ग्राम सभाओं को निर्देश दिए हैं कि वे शिविर स्थलों की जानकारी सार्वजनिक करें और अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें।
भूमि सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, खतियान वह दस्तावेज है जो भूमि के स्वामित्व और उसके सीमांकन को प्रमाणित करता है, जबकि वंशावली भूमि के पैतृक हस्तांतरण को दर्शाती है। इन दस्तावेजों के अभाव में सर्वेक्षण में देरी या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए ग्राम सभा स्तर पर शिविर लगाकर लोगों को एक ही स्थान पर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उन्हें दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
बनमा-ईटहरी प्रखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभाओं में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शिविर संचालित होंगे। वहीं सिमरी बख्तियारपुर में भी समान समय-सारिणी निर्धारित की गई है। संबंधित अधिकारी ने बताया कि शिविर में भूमि मालिकों को अपने मूल दस्तावेज, पहचान पत्र और पिछले रसीद की प्रति साथ लानी होगी। ग्राम सभा के सचिव और भूमि सर्वेक्षण सहायक मौके पर उपस्थित रहेंगे ताकि त्वरित सत्यापन हो सके।
स्थानीय निवासियों में इस पहल को लेकर उत्साह है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से भूमि संबंधी विवाद और रिकॉर्ड की कमी के कारण कई परिवार परेशान थे। ग्राम प्रधानों ने बताया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि शिविर में कोई भी व्यक्ति अपने दस्तावेज जमा करा सकता है, चाहे वह भूमि का मालिक हो या वारिस।
जिला भूमि सर्वेक्षण अधिकारी ने बताया कि यह शिविर आगामी चरणों की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें डिजिटल खतियान तैयार करने और भूमि विवादों के निपटारे को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि पर अपने नजदीकी ग्राम सभा शिविर में पहुंचकर अनिवार्य दस्तावेज जमा कराएं, ताकि सर्वेक्षण प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।